शोबा-ए-कुरआन-ए-करीम नाजरा
इस शोबे में नूरानी कायदे के बाद कुरान-ए-करीम नाजरा के साथ साथ हिन्दी दर्जा पांच और उर्दू दीनियात की किताबें पढाई जाती हैं। इस शोबे में बाहर के तलबा का दाखिला नही किया जाता, बल्कि मकामी तलबा का ही दाखिला किया जाता है
शोबा-ए-कुरआन-ए-करीम हिफ्ज व तजवीद
इस शोबे में कुरान-ए-करीम के साथ कवाइद तजवीद और उनके इजरा का एहतिमाम किया जाता है। उर्दू हिन्दी, अंग्रेजी दर्जा पांच और उर्दू दीनियात की किताबें पढाई जाती हैं। इस शोबे में मकामी तलबा के अलावा सिर्फ उन्ही बाहर के तलबा का दाखिला लिया जाता है जो कम से कम पाँच पारे हिफज करके उन्हे याद कर चुके हो।
शोबा-ए-तजवीद व किरात
शोबा ए हिफ्ज व दूसरे शोबों से फारिग होने के बाद जामिया हाजा में तजवीद व किरात का मुस्तकिल शोबा कायम किया गया है । जिसकी मुददत दो साल रखी गयी है । इस शोबे मे दारुल उलूम देवबन्द के निसाब के मुताबिक तजवीद व किरात की किताबें पढाई जाती हैं। उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी सिखाने के साथ साथ जरुरी मसले मसाइल से भी वाकिफ कराया जाता है । इन दो सालो मेें जहँा तालिबे इल्म एक अच्छा कारी बनकर निकलता है, वहीं हिन्दी व अंग्रजी में इतनी जानकारी हासिल कर लेता है जो उसकी दुनियावी जरुरियात के लिये काफी हो जाती है।
शोबा-ए-अरबी
इस शोबे में दारुल उलूम देवबन्द के निसाब के मुताबिक अरबी अव्वल से दौरा ए हदीस शरीफ तक निहायत ठोस और मैयारी तालीम दी जाती है।
जिसमें नहु व सर्फ तफसीर व हदीस वगैराह मुख्तलिफ सब्जेक्टस पढाये जाते हैं । इस शोबे की मुद्दत सात साल रखी गयी है । साल ए अव्वल अरबी व साल ए दोम में हर महीने इम्तिहान होते है, और बाकी क्लासों के साल में दो इम्तिहान होते है। पोजिशन लाने वाले तलबा को कीमती इनआमात दिये जाते है।
शोबा-ए-फारसी
चूंकि इस्लामी उलूम का एक बडा जखीरा और अरबी ग्रामर की शुरु की किताबें फारसी जबान में है नीज उर्दू जबान में बहुत सारे अल्फाज फारसी के बोले जाते है, इसलिए जामिया हाजा में फारसी जबान व अदब का एक मुस्तकिल शोबा रखा गया है।
जिसमें तेसीरुल मुबतदी से गुलिस्तां तक उर्दू हिसाब इस्लामी तारीख और कवाइद व तजवीद के साथ कुरआन ए करीम की तालीम का बहुत अच्छा इन्तिजाम है। इस शोबे मे सिर्फ उन्ही तलबा का दाखिला होता है जो कुरआन ए करीम को सही मखारिज के साथ पढने के साथ उर्दू अच्छी तरह पढ सकते है। इसकी मुद्दत चार साल रखी गयी है।
शोबा-ए-दीनियात उर्दू
नूरानी कायदे के बाद कुरान-ए-करीम के साथ ही बच्चों की उर्दू तालीम का सिलसिला शुरू हो जाता है। जिसमें तहरीर, नकल व इमला पर खास तवज्जों दी जाती है और मजहब की बुनियादी तालिमात से रोशनास कराने के लिए दीनी किताबें पढ़ाई जाती है।
शोबा-ए-हिन्दी, अंग्रेजी
इस शोबे में नूरानी कायदा खत्म होने के बाद नाजरा कुरान-ए-करीम मुकम्मल करने के साथ साथ उर्दू नीज हिन्दी, अंग्रेजी दर्जा पांचवीं तक पढ़ाने का इंतजाम किया गया है।
नीज अरबी अव्वल से अरबी पंजुम तक तलबा के लिए जूनियर हाईस्कूल तक अंग्रेजी पढ़ाने का इंतजाम भी है।
शोबा-ए-तालीम लडकियों के लिए
इसमें कोई शक नही के जिस तरह तालीम हासिल करना मर्दों के लिए जरुरी है उसी तरह औरतों के लिए भी जरुरी है । इसलिए अराकीने जामिया हाजा ने शुरु से ही इस शोबे की तरफ बहुत खास तवज्जो दी है, और अब हालात के तकाजो और लडकियों की बढती हुई तादाद के मददे नजर लडकियों की तालीम के लिए मदरसा खदीजातुलकुबरा लिलबनात के नाम से जामिया ही के जेरे इन्तिजाम एक मुस्तकिल इदारा कायम किया गया है।
जिसमें बहुत अच्छे उस्तादों की निगरानी में कुरआन-ए-करीम नाजरा मुकम्मल करने के साथ साथ उर्दू नीज हिन्दी, अंग्रेजी से प्राईमरी की तालीम दी जाती है।
शोबा-ए-इफ्ता
जामिया हाजा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मरकजी हैसियत हासिल है। इसलिए अमूमन तमाम मुसलमान और खासतौर पर इलाके के मुसलमान मजहबी, अख्लाकी, समाजी ओेैर तिजारती तमाम उमूर में शरई रहनुमाई हासिल करने के लिए जामिया का ही रुख करते है। इसलिए जामिया में एक मुस्तकिल शोबा दारुल इफ्ता के नाम से कायम है। उसके लिए जामिया को माहिर मुुफतियान ए किराम की खिदमात हासिल है।
शोबा-ए-लाइब्रेरी
इसमें कोई दो राय नही कि इल्म से तअल्लुक रखने वाले के लिए चाहे वो आलिम हो या तालिबे इल्म मुताले के बगैर कोई चारा नही, इसलिये जामिया हाजा में मकतबा ए इमाम रहमतुल्लाह कैरानवी के नाम से एक शानदार लाइब्रेरी कायम है। जिसमें मुख्तलिफ फुनून की कई हजार किताबें मौजूद है। शोबा-ए-बज्मे इस्लाहुल बयान
मदरसे में तलबा की अंजुमन है जिसमें उस्तादों की सरपरस्ती में खिताबत की मश्क के लिए हफ्ते वारी जलसे होते हैं। जिसका मकसद तलबा कीे इल्मी व अमली सलाहियत को परवान चढ़ाना और दीन का बेहतरीन दाई बनाना है।
शोबा ए बज्मे इमाम आसिम
जामिया हाजा में तरतीलन तदवीरन और हदरन मश्क के लिए शोबा ए बज्मे इमामे आसिम कायम किया है। जिस के जरिये तलबा-ए-तजवीद व किरात नीज तलबा ए हिफ्ज के अन्दर कुरआने पाक को सही बातजवीद पढ़ने के मौके फराहम किये जाते हैं।
शोबा-ए-मतबख
जामिया में तलबा की बड़ी तादाद है। उनके तआम का इंतिजाम एक जरूरी चीज है। जिसके लिए शोबा ए मतबख का कयाम जरूरी है । जिसमें बेरूनी तलबा के लिए खाने और नाश्ते का इंतिजाम किया जाता है।
इमदाद तलबा
बेरूनी तलबा को खाना, किताबें, रिहाईश, रोशनी का इंतिजाम और बीमारी की हालत में इलाज भी मदरसे की तरफ से होता है।
मौलाना कामिल हाई स्कूल कालिज
का संग ए बुनियाद
आज के दौर में दीनी तालीम व तरबियत के साथ साथ मौजूदा व आने वाली नस्लों को मॉडर्न तालीम से रुबरु करना वक्त की अहम जरुरत है। लिहाजा जरुरत है कि हमारी मौजूदा और आने वाली नस्लें दीनी व दुनियावी, सियासी हर मैदान की माहिर हो।
अलहम्दुलिल्लाह इस जरुरत को पूरा करने के लिए ओर खासतौर से जामिया के आस पास के इलाकों में बसने वाले बच्चों को दीनी माहौल में रखकर मॉडर्न तालीम से लेस करने के लिए जामिया की इन्तजामिया कमेटी ने इस मॉडर्न तालीमी निजाम को कायम करने का फैसला किया । और इस फैसले को अमल में लाते हुए 28 मार्च 2016 को मौलाना कामिल हाई स्कूल कालिज की नीवं भी रख दी गयी है ।
जो बहुत जल्द पाये तकमील को पहँुचेगी। इंशा अल्लाह ।
इजहारे तशक्कुर
हम अपने मुआविनीने किराम का शुक्रिया अदा करते है। जिन्होेंने अपने तआवुन और दुआओं से मदरसे को नवाजा है। अल्लाह तआला अपनी मरजिय्यात पर चलने की तौफीक अता करे आमीन ।
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